islam(इस्लाम)



कभी अर्श पर कभी फर्श पर कभी उनके दर कभी दरबदर गमे आसकी तेरा सुक्रिया मैं कहाँ कहाँ से गुज़र गया । कभी रास्तो पे तन्हा कभी हुबरू दे सहारा मैं जुनू का हमसफ़र हु मेरा कोई घर नही है।👳

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